सत्यनाम सत्यनाम सत्य नाम सार
गुरु महिमा अपार अमृत धार बहाइदे
हो जाही बेड़ा पार, सत्य गुरु ज्ञान लखइदे
सत्य लोक से सत गुरु आये हो...2
अमृत धार ला संत बर लाये हो...2
अमृत देके बाबा कर दे सुधार
तर जाही संसार....
अमृत धार.....
सत्यनाम.......
सत के तराजु में दुनिया ला तौलो हो...2
गुरुजी बताइने सच सच बोलो हो...2
सच के बोलइया मन हावे दुई चार
वही गुरु है हमारे....
अमृत धार बहाइदे
हो जाही बेड़ा पार, सतगुरु ज्ञान लखइदे
सतनाम......
हवलदार : कहां जाबे से चोरहा साले
(चोर मंच के एक ओर से दूसरी ओर भागता है)
बिलई ताके मुसवा बाड़ी में सपटके अटकन मटकन दही के
चटकन खोलो भैय्या मोर ढक्कन का चीज हे।
बिलई रोगही मरगे कहिके मुसवा सब आवे
कोई चढ़े पीठ में कोई दिल्लगी लगावे
देख के बोला चुप्पे उठे टांग मारे फटके बिलाई ताके.....
मन ने मन बिलई हा गुने
दिन दूबन्दे राह रे
कहां जाहू देखत हंव तुम सब
मोर मारे
पाछू में जे रही तेला ले जाहूं झपटके
बिलई ताके मुसवा...
जम्मो मुसवा अपन अपन ले एक-एक
बिखरागे
देख के वोला चुप्पे उठे टांग मारे फटके
बिलई ताके.....
बिलाई ताके
बिलई के सर पे राजे मुकुट
चुहा मारे दनादन ये चीज हे......
अटकन मटकन.........
हवलदार : (बीच में आकर चोर को पकड़ लेता है) का चीज हे बेटा मैं अभी बताथंव रे साले दिन दहाड़े चोरी करके भागथस रे मोला चिन्हत हस से मि. एच. एम. खान पुराना सर्विस वाला हवलदार साले तोर खाल में भूंसा भरके उल्टा लटका हूं बेटा (कालर पकड़ कर नीचे पटक देता है) रख मोटरा, तोर मुंडी ला काटके अधर फेकहूं बेटा।
चोर : (रोता है) ये दाई वो ...... मैं बिना मुंडी के मसान असन किंजरत रइहौं जी अऊ का करबे भैय्या?
हवलदार : अऊ का करबे कथस रे? साले तोर हाथ गोड़ ला काटके तिड़ी-बिड़ी बगरा हूं बेटा
चोर : (रोते हुए) मैं मरगेंव मोर दाई मोर हाथ गोड़ सब तिड़ी-बिड़ी बगरे रही जी, अऊ का करबे महराज
हवलदार : मोर गुस्सा ला भड़काथस रे तोर हाथ गोड़ ला काटके चिक्कन चटनी असन पीस के फ्राई करवा के काला कुत्ता ला खवाहूं बेटा।
चोर : (रोते हुए) मैं नइ बांचव दाई हो बने डटके खाबे रे कुकुर रोगहा अऊ कब खवाबे भैय्या।
हवलदार : मोर दिल ला जलाथस रे मोर बस चलतिस त अभी खवातेंव फेर का करंव रे सरकारी डयूटी में हंव कपड़ा खराब हो जही, रख मोटरा साले अतेक-अतेक कपड़ा तोर बाप के ये रे?
चोर : मोर नइये
हवलदार : तोर नइये? तब काकर ये रे?
चोर : ग्राहक के ये
हवलदार : ग्राहक के? तैं धोबी अस का रे?
चोर : हंव इंहा के खास धोबी हंव महाराज
हवलदार : अरे पहिली काबर नई बताये रे?
चोर : वाह तैं तो बताये के मौकाच नइ देय
हवलदार : हौ! सुन बेटा ये गांव में एक ठन सोन के थारी चोरी होय हे! तैं चोराय अस त बतादे अभी एक्के झन हंव छोड़ देहूं!
चोर : मैं चोरी-वोरी नइ करवं महराज!
हवलदार : शाबाश बेटा चोरी वोरी नइ करना चाही! तैं जानथस से वो चोर ला बता तोला इनाम दे हूं!
चोर : इनाम देबे?
हवलदार : हव
चोर : फेर ये मेर नइ बतांव
हवलदार : काबर
चोर : ये सब आदमी मन बइठे हे न येमन सब सुन डारही
हवलदार : हव! त कोन मेर बताबे
चोर : वो कोन्टा में बताहूं!
हवलदार : कोन्टा के आदमी कोन्टा में बताबे रे गड़बड़-बड़बड़ तो नई करबे
चोर : मैं गड़बड़ नई करवं महराज
हवलदार : ले चल (कोन्टे में जाते हैं)ले बता।
चोर : पहिली इनाम तो दे?
हवलदार : .......................
चोर : पहिली इनाम ला तो दे
हवलदार : अतका बड़ हवलदार के विश्वास नइये रे
चोर : पुलिस वाला के विश्वास नई करंव
हवलदार : अच्छा ले बाद में अऊ देहूं!
चोर : त सुन महराज जऊन हा चोरी करे हे ना वो चोर आय!
हवलदार : अरे चोर आय तेला त महुं जानथंव
चोर : तैं जानथस
हवलदार : हव
चोर : त भइगे पकड़ ले
हवलदार : बताबे तब
चोर : बताये तो हंव जी
हवलदार : का?
चोर : चोर
हवलदार : लगाहूंसाले खींच के झापड़ मैं चोर आंव रे! अरे बेटा मैं तो वो चोर के नाम ला पूछथव?
चोर : नाम ला पूछे महराज
हवलदार : हव
चोर : पहिली काबर न ई बताय, त सुन महराज जऊन हा चोरी करथे ना वोकर नाम चोरेच होथे दुसर नई होय!
हवलदार : हत रे गधा अबे जऊन हा चोरी करथे वोकर नाम तो चोरेच हो थे फेर मैं तो वोकर नाम ला पूछ थंव? (चोर भाग जाता है) अरे कहां चल देस रे अभीचे इंहा खड़े रीहिस कहां चलेगे अबे मोला धोखा देके कहां जाबे अभी पहुंचाथौं बेटा!
(हवलदार चोर के पीछे भागता है
चोर दूसरी ओर से मंच पर आता है)
चोर : देखे सोन के थारी ला बचा डरेंव वो देखन नइ पाइस! (डर कर भाग जाता है)