राजेन्द्र प्रसाद वर्मा
तोर पैरी करतान
मारेल छाती हें बान।
कलेप कलेप रही जाथें,
लईका सियान।
तोर पैरी कर...
नाचा देखे बरे संगी,
तोरेच ठन जाथे।
छुनुर-छुनुर पैरी ला,
ढेरेच ले पतियाथें।
देख-देख के, सुईन-सुईन के,
लगाये रहथे कान।
तोर पैरी कर...
सोंचत रहथें तोर निर,
हमु मन नाँचतेन।
नायेंच-नायेंच जमेच झन ला,
हमुमन देखातेन।
ठमेक-ठमेक कनिहाँ ला,
हिलाते जी जान।
तोर परी कर...
पाँयेझ मांदर संघे-संघे
सूर ला मिलातेन।
सुघर-सुखर करमा-डोमकेच,
हमुमन गातेन।
नायेच-नायेच के जमेच झन,
कर देतेन बिहान।
तोर पैरी कर...
रोगहा मइनसे मनहँ संगी,
नाचा देखे बर जाथें।
रोग राई हर ओमन करसंगी,
देख के छुटई जाथे।
देख के मारा हँ में
आये जाथे जान।
तोर पैरी कर...
सरगुजिहा गीत
कोनो गद्द अइसन होतीस
जेहर देतीस छाया।
कोनो हर फर देतीस,
कोनो करतीस माया।
कोनो गद्द...
डहरे आतीन जातीन,
जम्मोच झन बिसोतीन।
एको झे फर ला संगी,
टोयेर-टोयेर के खातीन।
हमरो किस्मत देका कहतीन
फर ला खाया।
कोनो गद्द...
जिनगी कर कोनो ठिकाना
नई हवे संगी।
आवत जात डहर है,
हो जायेल तंगी।
नई मेंटाये कोनो जग,
जम्मेच झन ला काया।
कोनो गद्द...
रेंगत रेंगत कोने न कोनो,
जम्मेच झन थकथें।
आवत जात कोनो न कोनो,
कहो जग बिसोथें।
एको दुगो होहीं तेमन,
करथौहीं छाया।
कोनो गद्द...