Shodh Prakalp Hindi English Research Magazine

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Dr. Sudhir Sharma
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Raipur

may i know you

please give me your information. I like this sahitya group
my e mai is purupanthi@yahoo.com
puru

ham apne zinggi se dur

kiatniajeeb bat hai ki aaj ham apane aap ko viksit kahne me kitana garv karte hai.hamara seena chauda ho jata hai yah jan kar ki fahter ki tankhawh kitani bad gai hai...kabhi din hamare chaurahe ke ek kone me ..ghanto baith kar ek pyali chay me hi din bit jaya karti thi...school colleg jati ladkiyo ko jate dekh kar.ya kisi nayee film ke bare me bate kar kar...ya thodi bahut padhai ki bate kar kar......tab jab haum ghar jate to kitane taje hote....dimaq ek dum saaf...hum khush rahte us bachaye paise se hi jo ma kuchh saman lane ke liye hame deti..aur haum jhuth bol kar use bacha liya karte..ye  read more »

बौद्धिक संपदा का साम्राज्य

सुधीर शर्मा
संपादक

हिंदी अब समूचे विश्व का भ्रमण कर रही है। भारतवंशियों ने विभिन्न देशों में हिंदी की अस्मिता का बनाए रखा है। सबसे अहम बात यह है कि भारतीय संस्कृति और हिंदी भारत की प्रचुर बौद्धिक संपदा के साथ विश्व-यात्रा पर है। यह यात्रा भारत के बाहर नए भारत के अस्तित्व के प्रमाण हैं। मैं अपनी ब्रिटेन-यात्रा के कुछ सुख आपके साथ बांटना चाहता हँ।

यह सुख भारत के बाहर ऐसे देश के भीतर का सुख है जो वर्षों तक हमें और हमारे जैसे अनेक देशों पर राज करता रहा। इन देशों की पूँजी, सांस्कृतिक संपदा और धन-वैभव का संग्रहालय नजर आता है समूचा ब्रिटेन। जब हम लंदन में भारत के कोहिनूर हीरे की नुमाइश के लिए कतारबद्ध होते हैं तब लगता है कि हमारा वैभव यहाँ किले में कैद है और अनेक राजकुमार अपनी बौद्धिक संपदा की पूंजी लेकर ब्रिटेन में अपना राज स्थापित करने और कोहिनूर की भारत वापसी के लिए आ चुके हैं।

इन राजकुमारों में साफ्टवेयर इंजीनियर, चिकित्सकों, व्यापारियों और मेहनतकश भारतीय शामिल हैं। भारतीयता का यह ध्वज ब्रिटेन के अनेक नगरों में लहरा रहा है।

इन राजदरबारों में नवरत्न भी हैं और इन्हीं नवरत्नों में से ब्रिटेन में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ विराजमान वहाँ के हिंदी कवियों का भरा-पूरा समाज है । हिंदी कवियों ने ब्रिटेन में हिंदी कविता को भारत की संवेदना और ब्रिटेन के वर्तमान समाज की जटिलताओं के साथ समन्वय के मध्य सेतु के रूप में स्थापित किया है ।

इन कवियों के मध्य जाकर लगा कि हिंदी साहित्य का वैश्विक स्वरूप अपने विराट स्वरूप में पाँव पसार रहा है । ब्रिटेन में अंताक्षरी खेलते समय भारतीय साहित्य के गाने गाते हैं । वे लौटते हैं हमारी सभ्यता-संस्कृति के सुहाने दिनों की ओर । इसीलिए मुझे मारीशस और ब्रिटेन जैसे देशों में नया भारत नजर आता है जो नया होते हुए भी भारतीय अस्मिता-बोध से परिचित है।  read more »

क्या है साहित्य का उद्देश्य

मक्सिम गोर्की
अनुवाद -नरोत्तम नागर

शायद मेरी बात से तुम सहमत होगे, अगर मैं कहूँ कि साहित्य का उद्देश्य है - खुद अपने को जानने में इंसान की मदद करना, उसके आत्मविश्वास को दृढ बनाना और उसकी सच की खोज को सहारा देना, लोगों की अच्छाइयों का उद्धाटन करना और बुराइयों का उन्मूलन करना, लोगों के हृदय में हयादारी, गुस्सा और साहस पैदा करना, ऊँचे उद्देश्यों के लिए शक्ति बटोरने में उनकी मदद करना और सौंदर्य की पवित्र भावना से उनके जीवन को शुभ्र बनाना। तो यह है मेरी व्याख्या।

जाहिर है कि यह व्याख्या एक खाका भर है और अधूरी है। तुम इसमें जीवन को परिष्कृत करने वाली दूसरी चीजें भी जोड़ सकते हो। लेकिन मुझे यह बताओ - क्या तुम इसे मानते हो?

एक समय था जब, यह धरती लेखनकला-विशारदों, जीवन और मानव-हृदय के अध्येताओं और ऐसे लोगों से आबाद थी, जो दुनिया को अच्छा बनाने की सर्वप्रबल आकांक्षा और मानव-प्रकृति में गहरे विश्वास से अनुप्राणित थे। उन्होंने पुस्तकें लिखीं, जो कभी विस्मृति के गर्भ में विलीन नहीं होंगी, क्योंकि वे अमर सच्चाइयों को अंकित करती हैं और उनके पन्नों से कभी न मलिन होने वाला सौंदर्य प्रस्फुटित होता है।  read more »

कृष्ण धर्म के आधार स्तम्भ श्रीमद्वल्लभाचार्य

सुश्री उपासना पाण्डेय

भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर जहाँ देवता भी जन्म लेने में अपने को कृत्कृत्य मानते हैं, समय-समय पर अधर्म के नाश और धर्म के उत्थान हेतु महान् तपस्वी, महात्मा व लोकसंग्रही महापुरुषों ने अवतार लिया है।

इसी महान् परम्परा में जनमानस के हृदय में भगवद भक्ति की अक्षुण्ण भागीरथी धारा प्रवाहित करने वाले महाप्रभु श्रीमद्वल्लभाचार्य का भी यहाँ अवतार हुआ। वल्लभाचार्य ने अन्य वैष्णव आचार्यों की भाँति भक्ति के शास्त्रीय स्वरूप को ही अधिक महत्व दिया है। उत्तर भारत में प्रभु श्रीकृष्ण की भक्ति को दृढ़ता प्रदान करने में उनका योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

उन्होंने जहाँ एक ओर भगवतकृपा पर आधारित भक्तिपरक 'पुष्टिमार्ग' का प्रवर्तन किया वहीं दूसरी ओर 'शुध्दाद्वैत' नाम से दार्शनिक सिध्दांत का प्रतिपादन भी किया। साथ ही अपने मतानुसार विधि-विधान सहित पूजा-प्रक्रिया भी सुनिश्चित की। इस प्रकार वल्लभ मत का सैध्दान्तिक व व्यावहारिक पक्ष दोनों ही अत्यन्त पुष्ट और समृध्द है।  read more »

लाइलाज बीमारी लेखकों की

पूरन सरमा

शायद उस बहुचर्चित काण्ड से तो आप भी परिचित होंगे जब मेरी एक व्यंग्य रचना दो बार छप गई थी। मेरी ही असावधानी के कारण हुई थी वह दुर्घटना। लेखक समुदाय मुझसे पहले से कुण्ठित था, बस उन्हें तो गोल्डन चांस मिल गया। धड़ाधड़ दफ्तर में लोग मिलने आने लगे तथा टेलीफोन बजने लगे।

एक ऐसी अनहोनी जिसकी मुझे कल्पना भी नहीं थी, सनसनी की तरह शहर की फिजां में फैल गई। रचना छपी उस दिन तक भी मुझे पता नहीं था कि काण्ड इतना विकराल रूप ले लेगा। लेखकों ने संपादक को पत्र लिख-लिख कर पस्त कर दिया तथा मांग की जाने लगी कि मुझे ब्लैक लिस्ट किया जाए। कुण्ठित लेखकों का यह मानना था कि वे मुझे ब्लैक लिस्ट कराने के बाद वे अपनी रचना आसानी से छपा सकेंगे।  read more »

वह लौट आया

चम्‍पा मावले

उस दिन प्रतिदिन की भांति ही सूरज उगा था और प्रतिदिन की भांति ही अम्मा की दिनचर्या भी प्रारंभ हो चुकी थी। परंतु अम्मा के शरीर में वह उत्साह और वह स्फूर्ति दिखाई नहीं दे रही थी जो मैं हमेशा दिखा करती थी। उसे देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था माने उसका शरीर मन-मन भर भारी हो गया हो और वह उसे चलाने के लिए ठेल रही हो। फिर भी वह अनमने ढंग से अपनी दिनचर्या निपटा रही थी।

वैसे उसने अपने जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारी थी। पति से बिछड़े कई वर्ष हो गए थे, परंतु वह नौकरी करती थी इसलिए उसे जीवन निर्वाह में कोई कठिनाई नहीं हुई थी। फिर भी अकेली होने के कारण अपने दायित्व निर्वाह में कुछ अड़चनें तो आई ही थीं, जिसे उसने आसानी से हटा लिया था।  read more »

बगैर वर्दी के

सुप्रभ कुमार

वर्दी में है बहुत गुण सदा रखिए संग
वर्दी ना पहनी तो लला, तेरी लज्‍जा होगी भंग

यह ताजातरीन दोहा हमें एक पुराने मित्र ने फोन पर सुनाया फोन पर सुनाया। मित्र बोले - भैया, पहन लो वर्दी वरना लग जाएगी सर्दी। हमने पूछा - भैया । ये तुम्हें क्या हो गया जो आज वर्दी-वर्दी चिल्ला रहे हो। मित्र ने कहा - देखो भैया, वर्दी में हैं बहुत गुण। मसलन अपने पड़ोसी पाकिस्तान के राष्ट्रपति को ही लो। अगर वे एक दिन भी वर्दी उतार दें तो उन्हें दूसरे दिन ही देश छोड़ना पड़ जाए। सारा पाकिस्तान उनकी वर्दी से खौफ खाता है। सेना की वर्दी पहनने से सेना वाले भी उनके साथ हैं।  read more »

विजेता

डॉ. नीलिमा द्विवेदी

अपूर्वा के कांपते हाथों से फोन का रिसीवर छूटते-छूटते बचा। उधर से भारी भरकम आवाज सुन कर वह घबरा गई। वह सोचने लगी कि रिसीवर नीचे रख दे। दूसरी तरफ से अब भी आवाज आ रही थी।

आखिर हिम्मत उसने हिम्मत की। रिसीवर कानों के आगे ले जा कर उधर से आवाज को सुनने लगी - च्हैलो, आप कौन बोल रहे हैं, आपकी आवाज नहीं आ रही है। जरा जोर से बोलिए ? आप कहां से बोल रहे हैं ? अपूर्वा ने साहस जुटाते हुए दबे-दबे स्वर में पूछा।

मैडम मैं कोनी पुलिस से हवलदार रामसिंह बोल रहा हूँ।
आपको किससे बात करनी है? थानेदारजी नहीं हैं क्या ?
साहब तो राउंड पर गए हैं, मैडम। आप कौन बोल रही हैं ?

देखिए, मैं बिलासपुर से बोल रही हूँ। मैं कुछ देर पहले अपने पति के साथ कोनी की तरफ से निकली हूँ। मैंने रतनपुर और कोनी के बीच एक आदमी को सड़क पर घायल अवस्था में देखा था। मैं तो चाह कर भी उसकी मदद नहीं कर पाई। प्लीज आप जरा इस मामले को देख लें। ज्यादा देर हो गई तो वह मर जाएगा।

आप कौन बोल रही हैं, मैडम?

देखिए, आपको मेरे नाम से क्या लेना-देना है? एक जिम्मेदार नागरिक का मैंने कर्तव्य निभाया है। ज्यादा बात करने से अच्छा है आप उस घायल की मदद को पहुंचें। अपूर्वा ने झुंझलाते हुए जवाब दिया।  read more »

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