- उत्पल बैनजी
'अज्ञेय से अरुण कमल तक' डॉ संतोष कुमार तिवारी का वृहत आलोचना ग्रंथ (दो खण्डों में) है, जिसमें पिछली अर्ध्दशती के महत्वपूर्ण तथा चर्चित कवियों के रचनाकर्म पर गंभीर समालोचनात्मक आकलन है।
लगभग सवा आठ सौ पृष्ठों के इस ग्रंथ में डॉ. तिवारी ने नई कविता, सृजन और समीक्षा पर अपने सारगर्भित विचार रखने के साथ ही साथ अज्ञेय, नागार्जुन, मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, भवानी प्रसाद मिश्र, नरेश मेहता, धर्मवीर भारती, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, दुष्यन्त कुमार, धूमिल, श्रीकान्त वर्मा, केदारनाथ सिंह, चन्द्रकान्त देवताले, भगवत रावत, ऋतुराज, अशोक वाजपेयी, लीलाधर जगूड़ी, राजेश जोशी, मंगलेश डबराल, उदय प्रकाश तथा अरुण कमल की रचनाओं पर एक सुधी पाठक तथा कविता के रसज्ञ एवं मर्मज्ञ आलोचक के रूप में अपनी विस्तृत बेलाग गंभीर टिप्पणियाँ की हैं।
इनके अलावा पुराने तथा नए लगभग चालीस कवियों के रचनाकर्म पर डॉ. तिवारी ने अपने सूक्ष्म दृष्टि से उन रचनात्मक तत्वों को उद्धाटित किया है, जिन्हें समीक्षा की बँधी-बँधाई लीक पीटने वाले पेशेवर समीक्षक अमूमन देख नहीं पाते। इस तरह लगभग 62 कवियों की रचनात्मकता पर गंभीर हस्तक्षेप करता है यह ग्रंथ अपने आप में अनूठा है। read more »